गुरुवार, 14 दिसंबर 2017

रंग जिंदगी के !!!





हँसती थी जब भी जिंदगी
खुशियों के मेले में
फ़िक्र, परेशानी, और
उदासियों के
गुब्बारे उड़ा कर
तालियाँ बजाकर
कोई मन बच्चा हो जाना चाहता था !
....
रंग जिंदगी के
सारे तुझसे हैं
ये मुहब्बत
बस उन अहसासों के
नाम अलग हैं !!

सोमवार, 11 दिसंबर 2017

बुनकर थी सांसे !!!

बुनकर थी सांसे
बनाती रहती
लिबास नये
जिन्हें पहनकर
जिंदगी कभी मुस्कराती
कभी गुनगुनाती
कभी बस रूहानी हो जाती !!


गुरुवार, 7 दिसंबर 2017

स्मृति हाज़मे की !!

स्मृतियों को मन की
फ़िक्र रहती है
तभी तो वो उसे
अकेला छोड़ती नहीं हैं
कोई खट्टी-मीठी
स्मृति हाज़मे की
खाई है कई बार
जब भी कभी
अकेलेपन की
बदहजमी हुई है 😊

सोमवार, 20 नवंबर 2017

फ़िक्र की धूप !!

..
कुछ रिश्ते
जिंदगी होतें हैं
परवाह और
अपनापन लिए
जिनमें फ़िक्र की
धूप होती है
और ख्यालों की छाँव !!!
...
शब्दों की बारिश से
भीगा है मन
मेरे आस पास
कुछ नमी सी है
कहीं तुम उदास तो नहीं ??

गुरुवार, 2 नवंबर 2017

कुछ रिश्ते !!!

कुछ रिश्ते
होते हैं कुम्हार से
गढ़ते ही नहीं
आकार भी दे देतें हैं
जीवन को ।
..
कुछ रिश्ते
होते हैं अजनबी से
अन्जाने बिना नाम के
शायद भावनाओं के
जो वक़्त और
परिस्थिति से निर्मित
मन के आँगन में
बने और पनपे होते हैं।
...

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मन को छू लें वो शब्‍द अच्‍छे लगते हैं, उन शब्‍दों के भाव जोड़ देते हैं अंजान होने के बाद भी एक दूसरे को सदा के लिए .....